संस्कृत भाषा के शब्द भंडार से सम्बंधित बातें

संस्कृत भाषा के शब्द भंडार से सम्बंधित बातें :
संस्कृत भाषा का शब्द भंडार अक्षय और अनंत है। इस भाषा का शब्द निर्माण कितना वैज्ञानिक है कि आवश्यकता अनुसार प्रत्येक विषय के नविन शब्दों का निर्माण सरलता से उत्पन्न हो जाता है। हिंदी में डॉ. रघुवीर ने संस्कृत के आधार पर ही एक बृहत् कोष तैयार किया है। जिसमें विज्ञानं, अर्थशास्त्र, चिकित्सा, अभियंत्रणा, तकनीकी प्राविधि की और प्रशासन के अंग्रेजी शब्दों का हिंदी में अनुवाद मौजूद है।
विक्रमकालिन महाकवि कालिदास से पूर्व संस्कृत साहित्य का पूर्ण विकास हो चूका था. कालिदास के प्रादुर्भाव से (आगमन से) संस्कृत साहित्य और भाषा में एक नूतन आभा और प्रतिभा छिटकी। जिस की चमक आज भी विद्यमान है। ‘अभिज्ञानशाकुंतलम्’, ‘मेघदूत’, कुमारसंभव’ आदि उनके अद्वितीय ग्रन्थ है। कालिदास की रचनाएँ ‘न भूतो न भविष्यति’ का वास्तविक उदहारण है। अश्वघोषभारवीमाघश्री हर्ष आदि महा महाकवियों ने कालिदास की शैली का अनुशरण किया। हिन्दी के रीतिकालीन और ब्रजभाषा के अनेक कवियों ने कालिदास को अपना आदर्श माना है। महाकवि गॅटे ने तो ‘अभिज्ञानशाकुंतलम्’ को ‘भू-लोक एवं स्वर्गलोक को एक करनेवाली’ रचना की उपाधि दी है।
ई. 7 वीं शताब्दी से 11 वीं शताब्दी तक कश्मीर में संस्कृत साहित्य का अभिनव उत्थान हुआ। इस समय आनंदवर्धन,क्षेमेन्द्र, बिल्हण, जल्हन, महान, महाकवि एवं साहित्य के निर्माण संरक्षण एवं संवर्धन तथा प्रसार कार्यो में अद्भुत कार्य किया।
इस युग में कनौज भी साहित्य सृष्टि का एक विशिष्ट केंद्र रहा है। यशोवर्म, महेन्द्रपाल, महिपाल आदि राजाओं के समय यहाँ भवभूति, राजेशेखर, श्रीहर्ष आदि विद्वानों ने उच्च कोटि के दृश्य काव्यों की रचना द्वारा साहित्य की महान सेवा की।
‘उत्तर रामचरित’, ‘मालतीमाधव’, कपूर मंजरी’, तथा ‘नैषधीय चरित’ जैसे उद्भूत नाटकों एवं महाकाव्यों की रचना इस समय हुई।
11 वीं शताब्दी के बाद दक्षिण भारत में संस्कृत साहित्य का निर्माण विशेष रूप से हुआ। इस युग में पं. राज जगन्नाथ के अतिरिक्त अप्पय दीक्षित, नीलकंठ दीक्षित आदि महाकवि तथा प्रचंड विद्वान ‘रसगंगाधर’ और ‘कुवलयानंद’ जैसे प्रौढ़ एवं विद्वता पूर्ण ग्रंथो का निर्माण हुआ।

संस्कृत साहित्य निर्माण काल की अंतिम अवधि विक्रम की 20 वीं शताब्दी के प्रारंभ काल तक रही है। वर्तमान समय में भी भारत के भिन्न-भिन्न प्रान्तों में साहित्य निर्माण का कार्य चलता आ रहा है।   


- कौशल्या वाघेला
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